Sad Shayari in Hindi | सैड शायरी

Sad Shayari तब शेयर करते हैं या अपने स्टेटस के तौर पर लगाते हैं, जब ज़िंदगी में हालात कुछ ऐसा मोड़ ले लेते हैं कि इंसान को हर जगह सिर्फ हार या फिर धोखे का सामना करना पड़ता है। उस वक्त इंसान के पास अपनी बेबसी और दर्द को बयां करने के लिए सिर्फ शब्दों का ही आखिरी सहारा बचता है। आज के इस सोशल मीडिया दौर में Sad Shayari दिल को छूने वाली और Emotional Sad Shayari सिर्फ साधारण शायरी नहीं, बल्कि उन दिलों की आवाज़ बन चुकी है जो अंदर से पूरी तरह टूट चुके हैं। जब ज़ुबान खामोश हो जाती है या लोग अपना दर्द बयां नहीं कर पाते, तो लाइफ में Sad Shayari और Broken Heart Shayari आँखों के आँसूओं को शब्दों का एक खूबसूरत रूप दे देती हैं।

सोशल मीडिया पर आज Breakup Shayari और Alone Shayari तेजी से ट्रेंड कर रही हैं, क्योंकि हर वो शख्स जो इस मतलब से भरी दुनिया में वफ़ा ढूँढ़ते-ढूँढ़ते पूरी तरह थक गया है, वो इन Hindi Sad Shayari में कहीं न कहीं खुद की ही कहानी पाता है। लोग इंटरनेट पर Dard Bhari Shayari  तलाशते हैं—कोई अपने बिखरे हुए प्यार को याद करने के लिए, तो कोई दुनिया को यह दिखाने के लिए कि दिल टूटने के बाद भी उनकी खुददारी का हौसला आज भी बुलंद है।

ये शानदार शायरियाँ आप अपने WhatsApp, Instagram और Facebook जैसे सोशल मीडिया अकाउंट्स पर स्टेटस के तौर पर शेयर कर सकते हैं।

“एक तरफ़ा ही सही, मगर प्यार तो है;
तुझे ना सही, मुझे तो है।”

“हालात ने कुछ ऐसा मोड़ ले लिया,
जिसे अपना समझा उसी ने छोड़ दिया।”

“वक्त के साथ सब बदल गया,
बस दर्द वही रह गया।”

“अजीब लोग हैं दुनिया के,
कहते हैं मुस्कुराते रहो और वजह भी छीन लेते हैं।”

“वक़्त बता देता है,
लोग जैसे नज़र आते हैं वैसे बिल्कुल नहीं होते।”

“ढल चुकी है शराब प्याले में पीनी तो पड़ेगी,
जिंदगी बेकार ही सही पर जीनी तो पड़ेगी!”

“हकीकत यही है कि यहाँ कोई किसी का नहीं होता,
वक्त आने पर साया भी साथ छोड़ देता है।”

“वक्त बदलता है, लोग बदलते हैं,
और अंत में बस कड़वी सच्चाई रह जाती है।”

“प्यार में अक्सर ऐसा होता है,
जो सबसे ज्यादा प्यार करता है वही रोता है!”

“अपने ही मन को मनाते-मनाते,
ना जाने कितनी अनबन हो गई है खुद से।”

“उनसे गिले-शिकवे कैसे,
जब रहना है तन्हा तो फिर रोना कैसा।
जो था ही नहीं अपना, उसे खोना कैसा।”

“डर लगता है अब किसी को अपना बनाने से,
लोग थोड़ा सा वक्त देकर ज़िंदगी की सारी खुशियाँ छीन लेते हैं।”

“अब मत मिलना मुझे दोबारा,
बहुत वक्त लगता है खुद को संभालने में।”

“बार-बार की चोट से तो पत्थर भी टूट जाता है,
मैं तो फिर भी इंसान हूँ।”

“ज़िंदगी बर्बाद कर देता है वो एक शक,
जो छोड़ता भी नहीं है और अपनाता भी नहीं है।”

“ज़िंदगी में खुशी का तो पता नहीं,
लेकिन तकलीफ़ हर दिन मिल जाती है।”

“तकलीफ़ तो हक़ीक़त ने दी है,
ख़्वाब तो आज भी खूबसूरत हैं।”

“कभी-कभी हम गलत नहीं होते,
हमारे पास वो शब्द ही नहीं होते
जो हमें सही साबित कर सकें।”

“किसी पर इतना यकीन भी मत करना इस ज़माने में,
यहाँ लोग गले लगाकर पीठ में खंजर उतार देते हैं।”

“प्रेम हो या भोजन, किसी को ज़्यादा दे दो तो
वो अधूरा छोड़ कर चला जाता है।”

हँसते हुए चेहरों को गौर से देखा करो,
हर मुस्कुराहट के पीछे एक गहरा दर्द छुपा होता है।

दिल पर लगी बातें अक्सर,
इंसान को खामोश कर देती हैं।

आँखों का पानी और दिल की कहानी,
हर किसी को समझ नहीं आती।
जो दर्द खुद जीते हैं,
वही इसकी कीमत जानते हैं।

वो आँसू सबसे ज्यादा दर्द देते हैं,
जो आँखों से गिर नहीं पाते,
बल्कि दिल के किसी कोने में जम जाते हैं।

सब कुछ तो पा लिया बस तुझे न पा सके,
मेरे दिल के अरमान आज भी तेरी चौखट पर दम तोड़ते हैं।

काँच तो टूटकर बिखरता है सिर्फ ज़मीन पर,
पर जब दिल टूटता है,
तो उसकी गूँज रूह तक सुनाई देती है।

कुछ कहानियाँ मुकम्मल होने के लिए नहीं,
बस याद रखने के लिए होती हैं।

किसी को क्या बताएँ हाल-ए-दिल अपना,
हम तो खामोश रहकर सब सहते रहे।

“कभी-कभी ऊपरवाला खुद ही रिश्ते खराब करता है,
ताकि ज़िन्दगी खराब ना हो।”

“झूठ बोलने से पाप लगता है,
और सच बोलने से आग।”

“वफ़ा की उम्मीद हमने अपनों से की थी,
मगर उन्होंने तो हमारी औकात नापने में ही वक्त गुज़ार दिया।”

“हाथ तो छूट गया,
मगर यादों का साथ आज भी जुदाई के जख्म भर देता है।”

“अल्फाज़ तो बहुत हैं,
पर सुनने वाला अब कोई नहीं।”

“शायद मैं ही गलत था जो तुझसे वफ़ा की उम्मीद की,
पत्थर के बुत कभी रोया नहीं करते।”

“इस मतलबी दुनिया में वफ़ा ढूँढना बंद करो,
यहाँ लोग मतलब के लिए हाथ मिलाते हैं और मतलब के लिए दिल।”

“वो जो शोर मचाते हैं वो चाहत और होगी,
हमारी खामोश मोहब्बत तो बस एक अधूरी इबादत है।”

“मिटाए नहीं मिटते ये दर्द भरी यादों के निशाँ,
जैसे ठहरे हुए पानी में कोई पत्थर मार गया हो।”

“ये जुदाई का मंज़र और मेरी बेबसी देखो,
हाथ भी न मिला सके जब वो पास से गुज़रे।”

“खामोशी और अकेलापन अब दोस्त बन गए हैं मेरे,
ये जख्मी दिल अब शोर से घबराने लगा है।”

“बड़े शौक से बनाया था तुमने ये आशियाना मेरे दिल में,
जाते-जाते इसे उजाड़ कर तुमने अपनी फितरत दिखा दी।”

ज़ख्म वही है जो छुपा लिया जाए,
जो बता दिया जाए वो तमाशा बन जाता है।

वो जो रूह में बसे होते हैं,
उनके बिछड़ने पर सिर्फ आँखें नहीं रोतीं,
पूरी कायनात वीरान लगने लगती है।

दर्द की भी अपनी एक तहज़ीब होती है,
ये सबके सामने तमाशा नहीं बनता,
बस अंदर ही अंदर इंसान को पिघला देता है।

जुदा होकर भी तू मुझसे जुदा नहीं है,
मेरी हर धड़कन में आज भी तेरी ही आहट सुनाई देती है।

मेरी मोहब्बत अधूरी रही तो क्या हुआ,
मेरा दर्द तो पूरा है।

कोई शौक से नहीं रोता साहिब,
आँसू तभी आते हैं जब दर्द बर्दाश्त नहीं होता।

यादें क्यों नहीं बिछड़ जातीं,
लोग तो पल में बिछड़ जाते हैं;
कुछ चेहरे दिल में ऐसे बसते हैं
जो उम्र भर याद आते हैं।

लिखना तो था कि हम खुश हैं उसके बिना,
मगर कलम से पहले मेरी आँखों से आँसू निकल गए।

“तेरी यादें किसी मीठे ज़हर से कम नहीं,
पीना भी मजबूरी है और मरना भी नामुमकिन।”

“बचपन वाले खिलौने आवाज़ दे रहे हैं,
‘कैसा लगता है,
जब लोग तुम्हारे साथ खेलते हैं?’”

“मजबूरी का नाम देकर वो तो चले गए,
पर मेरी बेबसी देखो कि मैं आज भी उनके लौटने की दुआ करता हूँ।”

“हँसते हुए चेहरे पर न जाना मेरे,
आँखों की नमी से पूछना कि रातें कैसे गुज़रती हैं।”

“जिस्म के ज़ख्म तो वक्त के साथ भर जाते हैं,
पर रूह पर लगे ज़ख्मों का कोई मरहम नहीं होता।”

“वो आख़िरी अलविदा सबसे मुश्किल था,
मुड़कर देखना भी था और दूर जाना भी था।”

“हम तो उनकी बेवफाई को भी अपनी किस्मत समझ बैठे,
हकीकत तो ये थी कि उनकी वफ़ा की मंज़िल कोई और थी।”

“मेरे अंदर का शोर अब मेरी खामोशी बन गया है,
मैं हँसता तो हूँ, पर वो हँसी सिर्फ एक दिखावा बन गई है।”

“वक़्त के साथ ज़ख्म तो भर जाते हैं अक्सर,
पर ये यादों के निशान हर रोज़ नया दर्द देते हैं।”

“आँखों में सजे थे जो सपने, वो पल भर में बिखर गए,
हम तो वहीं खड़े रहे, पर मंज़िल और रास्ता दोनों बदल गए।”

“शायद मेरी इबादत में ही कोई कमी रही होगी,
वरना पत्थर भी पिघल जाते हैं इतनी शिद्दत के बाद।”

 

सबक ज़िंदगी ने सिखाया है मुझे,
हर अपने ने रुलाया है मुझे।
कोई अपना नहीं होता,
ये भी अपनों ने सिखाया है मुझे।

वक़्त ने सब कुछ सिखाया,
लेकिन अफ़सोस वक़्त पर नहीं सिखाया।

ऐ ज़िंदगी, तू अपनी आज़माइशें कम कर दे,
हम भी अब पत्थर हो गए हैं,
हमें अब दर्द नहीं होता।

जिम्मेदारियों के बोझ ने सारा बचपन छीन लिया,
अब तो बस एक चलती-फिरती मशीन बन कर रह गए हैं।

जिंदगी की किताब में कुछ पन्ने हमेशा कोरे ही रह जाते हैं,
कुछ ख्वाहिशें दिल के किसी कोने में दम तोड़ देती हैं।

अकेले ही गुज़रता है हर मोड़ ज़िंदगी का,
यहाँ भीड़ तो बहुत है,
मगर साथ कोई नहीं चलता।

ज़िंदगी से एक चीज़ सीखी है,
लोग बदलते नहीं हैं,
बस उनकी प्राथमिकताएँ बदल जाती हैं।

हम रोज़ उदास होते हैं और रात गुज़र जाती है;
एक दिन रात उदास होगी
और हम गुज़र जाएँगे।

सब गुज़र तो जाता है,
मगर कुछ यादें उम्रभर रह जाती हैं।

ज़िंदगी ने पूछा, सपना क्या होता है?
हक़ीक़त बोली,
खुली आँखों में जो अपना हो वही सपना होता है।

“शोर न कर ऐ दिल, ज़रा खामोश हो जा,
यहाँ दर्द सुनने वाले कम और मज़ाक उड़ाने वाले ज़्यादा हैं।”

“इश्क में बिछड़ने का ग़म वही जानता है,
जिसने अपनी पूरी दुनिया किसी एक शख्स में बसा ली हो।”

“मजबूरी में जब कोई जुदा होता है,
ज़रूरी नहीं कि वो बेवफ़ा होता है;
देकर वो आपकी आँखों में आँसू,
अकेले में खुद भी रोता है।”

“हर इंसान का दिल बुरा नहीं होता,
हर इंसान बेवफ़ा नहीं होता;
बुझ जाते हैं दिए कभी तेल की कमी से,
हर बार कसूर हवा का नहीं होता।”

“हम किसी के लिए उतने ज़रूरी नहीं होते,
जितना हम सोचते हैं।”

“इंतज़ार हमेशा रहेगा,
बस आवाज़ नहीं देंगे।”

“मोहब्बत करने चला है,
तो कुछ अदब भी सीख लेना ऐ दोस्त।
इसमें हँसते साथ हैं,
पर रोना अकेले ही पड़ता है।”

“इश्क़ में किसी का इंतज़ार मत करना,
अगर हो सके तो किसी से प्यार मत करना।
कुछ नहीं मिलता किसी से इश्क़ करके,
खुद की ज़िंदगी इश्क़ में बेकार मत करना।”

“बहुत तमन्ना थी, प्यार में आशियाना बनाने की,
बना चुके तो लग गई नज़र ज़माने की।
उसी का कर्ज़ है, जो आज है आँखों में आँसू,
सज़ा मिली है हमें मुस्कराने की।”

“भूल शायद बहुत बड़ी कर ली,
दिल ने दुनिया से दोस्ती कर ली।
तुम मोहब्बत को खेल कहते हो,
हमने तो बर्बाद ज़िंदगी कर ली।”

दिल तूटने की आवाज नहीं होती,
पर दर्द बहुत होता है।

टूट गया दिल, अब बवाल क्या करें,
खुद ही किया था पसंद,
अब सवाल क्या करें।

दिल तोड़ दिया तुमने,
अब यकीन भी टूट गया;
जिसे टूटकर चाहा था,
उसे चाहकर ही टूट गया।

पता नहीं ज़िंदगी में क्या हो रहा है,
चेहरा हँस रहा है
और दिल रो रहा है।

दिल तोड़ने वाले कभी ये नहीं सोचते,
कि जो टूटता है
वो फिर पहले जैसा नहीं होता।

कदर करने वालों को हमेशा
बे-कदर लोग ही मिलते हैं;
जो दिल से रिश्ते निभाते हैं,
अक्सर वही तन्हा रहते हैं।

समेट कर ले जाओ
अपने इन झूठे वादों के टुकड़ों को,
मेरे दिल के टुकड़े पहले ही
बहुत बोझ बढ़ा रहे हैं।

हम समझते रहे उन्हें अपना,
पर वो कभी हमारे थे ही नहीं;
जिसे अपना माना दिल से,
वो हमारे नसीब में था ही नहीं।

जब-जब लगा मैं तेरे लिए खास हूँ,
तेरी बेरुखी ने समझा दिया
कि मैं बस एक झूठी आस हूँ।

वो दिल ही क्या जो टूटने से डरे,
और वो मोहब्बत ही क्या
जो किसी के लिए न तड़पे।

“ये इश्क़ है, तुझे पाने की कोई वजह नहीं।
तू उनसे मिलती है, जिसके दिल में तेरी कोई जगह नहीं।”

“खुद को खुद ही जीना सिखाया है मैंने,
क्या कहूँ कि कैसे ग़मों को गले लगाया है मैंने।”

“तुम मेरे सब्र का अंदाज़ा नहीं लगा सकते,
मैंने उसे हँसकर खो दिया, जिसे रोकर माँगा था।”

“व्यवहार में सुंदरता रखो,
फ़िल्टर से चेहरे चमकते हैं, दिल नहीं।”

“इंसान अपने रहन-सहन का तरीका बदल सकता है,
बुद्धि, नीयत और तक़दीर नहीं।”

“कट रही है ज़िंदगी रोते हुए,
और वो भी तुम्हारे होते हुए।”

“सभी को खुश तो,
भगवान भी नहीं रख सकता,
फिर आप तो केवल एक इंसान हैं।”

“वजह चाहे जो भी हो,
धोखा…
धोखा ही होता है।”

“पूरी ज़िंदगी में तुम ना मिले,
ये भी
एक अधूरी कहानी रह गई।”

“कभी ये मत सोचना कि
याद नहीं करते,
बस ज़िक्र करना
छोड़ दिया है।”

 

हम सिर्फ उनके वक़्त का सहारा थे,
ये बात समझने में देर लगी;
जब ज़रूरत खत्म हुई उनकी,
हमारी अहमियत भी मिट गई।

अलविदा कहना ही था तो
ज़िंदगी में आए क्यों थे?
जुदा होना ही था अगर
तो हमसे दिल लगाए क्यों थे?

हम तो बने ही थे तबाह होने के लिए,
तेरा छोड़ जाना तो महज बहाना बन गया!

ढलते सूरज की शाम ढल गई,
मेरी जान तू भी बदल गई!

जब हो गई हमें उनकी आदत,
तो वो बदल गए;
जिनसे हर बात साझा करते थे,
वो ही दूर निकल गए।

वो हाथ छुड़ाकर चले गए,
ये उनकी मजबूरी थी,
मगर वो आखिरी अलविदा कहना
आज भी एक अधूरा जख्म है।

एक आख़िरी उम्मीद थी कि
शायद तुम लौट आओगे,
पर तुम्हारी खामोशी ने बता दिया
कि अब हम अजनबी हैं।

कभी मुझ को साथ लेकर,
कभी मेरे साथ चल कर,
वो बदल गया अचानक,
मेरी जिंदगी बदल कर!

वो जो कहते थे कि मर जाएँगे तेरे बिना,
आज किसी और की बाहों में
जीने की कसमें खा रहे हैं।

दिल तो आज भी करता है
बात करने का,
पर अब हक नहीं रहा
उसपे मेरा।

दुआ माँगी थी आशियाने की,
चल पड़ी कहानी ज़माने की।

“जो लोग कदर नहीं करते,
उन्हीं के लिए
लोग रोते हैं।”

“कभी-कभी मुझे ऐसा कुछ पाना था,
जिसे पाने की चाह में
मैंने खुद को ही खो दिया।”

“ऐसा कौन आ गया है
तेरी ज़िंदगी में,
जो मेरी याद आने का
मौका ही नहीं देता?”

“आज मुझसे बात करने को
तरस रहे हो ना,
देखना…
एक दिन मेरी आवाज़ सुनने के लिए भी तरस जाओगे।”

“डर लगता है मुझे,
कहीं खो न दूँ तुझे।”

“टेंशन एक ऐसा तोहफ़ा है,
जो हमें अक्सर
हमारे अपने ही देते हैं।”

“जब इंसान की ज़रूरत
पूरी हो जाती है,
तो उससे बात करने का
तरीका भी बदल जाता है।”

“फिर एहसास हुआ…
उसे फुर्सत ही कहाँ है,
जो मेरे लिए
वक़्त निकाले।”

“आजकल चाहने वाले
ऐसे ही होते हैं।”

अकेलेपन का अब हमें कुछ यूँ अभ्यास हो गया,
भीड़ में भी खुद को ढूँढना
एक अहसास हो गया।

ये तन्हाई भी बड़ी अजीब है दोस्तों,
खुद से ही बात करने का
ज़रिया बन जाती है।

कब्र सा सन्नाटा है मेरे अंदर,
और लोग पूछते हैं
इतना खामोश क्यों रहते हो।

महफ़िल में भी तन्हा रहना सीख लिया है,
क्योंकि अब अपनों पर यकीन करना
छोड़ दिया है।

रात की तन्हाई अक्सर सवाल करती है,
“वो जो तुम्हारा सब कुछ था,
अब कहाँ है?”

मुझे ऐसा लगा कि अब मैं गुमनाम हो जाऊँ,
इस दुख दर्द देने वाली दुनिया से
दूर हो जाऊं।

नींद तो गायब है,
बस तेरी यादों का पहरा है।

“नींद भी कितनी अजीब चीज़ है,
आ जाए तो सब कुछ भुला देती है,
और ना आए तो
बहुत कुछ याद दिला देती है।”

“एक दौर ऐसा भी आया ज़िंदगी में,
जब मुझे
अपनी ही पसंद से नफ़रत हो गई।”

“गलत इंसान से धोखा खाकर,
लोग अक्सर
सही इंसान से बदला लेने लगते हैं।”

“कितनी अजीब हो गई है ज़िंदगी,
अब खुश दिखना
खुश होने से ज़्यादा ज़रूरी हो गया है।”

“बहुत Busy रहने लगे हो,
मुझे याद करने का
अब तुम्हारे पास वक़्त ही नहीं रहा।”

“शिकायत करने से
खामोश रहना बेहतर है,
जब किसी को फर्क ही न पड़े,
तो शिकायत कैसी?”

“मेरी वजह से
अगर किसी को भी दुख पहुँचे,
तो सबसे ज़्यादा दर्द
मुझे ही होता है।”

“नमक की तरह हो गई है ज़िंदगी,
लोग स्वाद लेकर
भूल जाते हैं।”

“बचपन में कहानियाँ सुनकर सोते थे,
आज अपनी ही कहानी सोचकर
रोते-रोते सो जाते हैं।”

“तेरे बिना इस दुनिया में
जीना तो सीख लिया है,
मगर मुस्कुराना
अब भी नहीं आया।”

“याद आती है
तुम्हारे साथ बिताई हुई
हर एक बात।”

“आज मैंने ऊपर वाले से पूछा,
मेरी मोहब्बत अधूरी क्यों लिखी?
वो मुस्कुराकर बोला—
‘हर कहानी का मुकम्मल होना ज़रूरी नहीं।’”

कहाँ ज़ख्म खोल बैठा पगले,
ये नमक का शहर है।

ज़ख्म कहाँ से मिला ये छोड़िए,
बस ये देखिए कि हम
अब भी मुस्कुराना नहीं भूले।

दर्द की भी अपनी एक अलग ही शान है,
ये हर किसी के हिस्से में नहीं आता।

जिस्म तो ज़िंदा है,
मगर रूह कहीं खो गई है,
तुझसे बिछड़कर ये जिंदगी
बस एक समझौता हो गई है।

ना मौत से दूर हूँ,
ना ज़िंदगी के पास हूँ,
साँसे चल रही हैं
पर एक ज़िंदा लाश हूँ।

दिल का ज़ख्म दिखाया नहीं जाता,
ग़म का किस्सा बार-बार सुनाया नहीं जाता;
तुम जी भर कर देख लेना इस चेहरे को,
क्योंकि बार-बार कफ़न हटाया नहीं जाता।

हकीकत ये है कि यहाँ
सब तमाशा देखने वाले हैं,
दर्द जब खुद पर गुज़रता है,
तभी समझ आता है।

दिल पर लगे ज़ख्म दिखते नहीं,
पर इनकी टीस इंसान को
अंदर ही अंदर खत्म कर देती है।

“जिसके एक मैसेज से चेहरे पर मुस्कान आ जाया करती थी,
अब उसी के इंतज़ार में
पूरा दिन रोते-रोते गुजर जाता है।”

अब किसी से उम्मीद नहीं रखते,
क्योंकि दर्द अक्सर
अपने ही देते हैं।

किसी को चाहकर भी ना पाना,
शायद यही सबसे बड़ा दर्द होता है।

दिल तोड़कर वो मेरा चैन से सो गए,
हम अपनी रातें उनकी यादों में
रो कर गुज़ारने लगे।

“अपना ख़्याल रखा करो,
क्योंकि मेरे पास
तुम्हारे जैसा कोई नहीं है।”

“कल अगर बिना माँगे
कुछ मिल जाए,
तो उसकी कदर
दिल से करना।”

“अगर रब मुझे कुछ नहीं दे सकता,
तो बस इतना दे—
उम्मीद के साथ
मैसेज करने वाला कोई अपना।”

“जो रिश्ता कभी सच्चा था,
उस रिश्ते से
प्यारा कोई नहीं होता।”

“नसीब कुछ बार
बहुत देता है,
और फिर बिना पूछे
छीन भी लेता है।”

“हमसे बात नहीं करनी
तो मना कर दो,
यूँ ऑनलाइन रहकर
इग्नोर मत करो।”

“किसी की कितनी भी Care कर लो,
एक दिन वो कह ही देगा
‘तुम मुझे कभी समझ नहीं पाए।”

“दिल का हर दर्द अब गहरा होता जा रहा है,
जिंदगी का हर लम्हा तन्हा होता जा रहा है।
कभी सोचा था मिलेगी खुशियां हमें भी,
मगर अब हर ख्वाब अधूरा होता जा रहा है।”

“कभी जरूरत पड़े तो याद कर लेना हमें,
क्योंकि बदले आप हो, हम नहीं।”

थक गया है मेरा दिल
तेरा इंतज़ार करते-करते,
पर ये कमबख्त धड़कन
आज भी तेरे नाम पर ही रुकती है।

तेरे बिना ज़िन्दगी जीना बहुत मुश्किल है,
और तुझे ये बताना
और भी मुश्किल है।

किस्मत कुछ ऐसी थी
चैन से जीने की हिम्मत नहीं हुई,
जिसे चाहा वो मिला नहीं,
जो मिला उससे मोहब्बत नहीं हुई।

अपनी ही किस्मत से हारकर
अब खामोश बैठना सीख लिया है,
जो कभी मेरा सब कुछ था,
उसे किसी और का होते देख लिया है।

वक्त ने सिखा दिया है
हमें मुस्कुराकर जीना,
वरना इस ज़िंदगी ने तो
कोई कसर नहीं छोड़ी थी रुलाने में।

मोहब्बत की ये कैसी सज़ा मिली हमें,
न वो मिल सके,
न हम खुद को पा सके।

थक गया हूँ मैं
खुद को साबित करते-करते,
अब तो बस ये दिल
हार जाने की इज़ाज़त माँगता है।

“आजकल ब्लॉक लिस्ट में
मोहब्बत
ज़्यादा मिलती है।”

“तुम मोहब्बत की बात करते हो,
आजकल लोग
Reply भी शक्ल देखकर करते हैं।”

“कुछ लोग टूटकर भी मुस्कुरा लेते हैं,
और कुछ लोग
ज़रा-सी बात पर बिखर जाते हैं।”

“जो तुम्हें भूल गया,
उसके लिए
खुद को मत खोओ।”

बेमौसम बरसती इस बारिश की बूंदों में
मेरे अश्क़ छुप जाते हैं,
जब भी उसकी याद आती है,
सीधे इस मासूम दिल को रुलाते हैं।

खुदा करे किसी लड़की का
पहला प्यार कभी अधूरा ना रहे,
क्योंकि इस दर्द की तड़प में
जीने वाले पल-पल मर जाते हैं।

माँगा था जिसे खुदा से
हर रोज़ एक पाक इबादत की तरह,
वो छोड़ गया मुझे इस मोड़ पर
किसी पुरानी आदत की तरह।

ज़माने की बंदिशों ने
हमारे बीच दूरियां इस कदर बढ़ा दीं,
कि दो सच्चे चाहने वालों की
तकदीर हमेशा के लिए मिटा दी।

पहला प्यार हुआ तो भी
ऐसे इंसान से हुआ,
जिसे भूलना बस में नहीं
और पाना किस्मत में नहीं।

ना जाने क्यों आती है याद तुम्हारी,
आँखों से नमी बहा जाती है;
दिल की बातें अधूरी रह जाती हैं,
और तन्हाई सता जाती है।

कोशिश तो बहुत की
तुम्हें भुला देने की,
मगर तुम्हारी यादों का सैलाब
हर बार बाँध तोड़ देता है।

तेरी यादें उस पुरानी किताब की तरह हैं,
जिसे मैं जितनी बार खोलता हूँ,
एक नया दर्द मिलता है।

मेरी खामोशी को मेरा गुरूर मत समझना,
बस कुछ दर्द ऐसे हैं
जो लफ्जों में बयां नहीं होते।

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